प्यारी माँ ,
तुम्हारी बेटी का यह पत्र तुम्हारे नाम आखरी पत्र है .पहले भी पत्रों मे अपनी व्यथा कथा उड़ेलती रही हूँ .हर आहट पर आस लगाए द्वार खोलती कही मेरे वीर को भेजकर तुम इस कैद से मुझे मुक्ति दिला दो। किन्तु बीर, जिसकी कलाई पर बचपन से राखी बांधा करती थी और तुम बार बार कर्णवती के लिए लाव लश्कर लेकर आये उसके विजातीय भाई हुमायू की कथा कहती थी । और मे भी पूरे मनोयोग से उस कथा को सुना करती थी , तो फिर माँ एक कोख जाया भाई बहिन की पुकार पर क्यों नहीं आ सकता ।
इसी उम्मीद के सहारे मैने लड़खड़ाते हुए शब्दों की बैसाखी थामे कितनी बार आवाज लगायी । लगता है मेरी आवाज अब तुम तक नहीं पहुचती । पहुचेगी भी कैसे ,बेटी के ससुराल और मायेके के बीच समाज के ढेकेदारो दुवारा दीवार बना दी जाती है । जो चाहते हुए भी तुम लांघ नहीं सकती माँ ।
देह को कागज़ बनाकर ढेरो पीडाए ,कथा -व्यथा तुमे लिखी माँ।
स्वयम ही बंच बंच कर धोती रही और फिर थक हार कर तुम्हे भेज दी । तुम्हारी स्म्रातियो का मरहम मुझे सुखदायी लगता है । बचपन मे मेरे सिर पर फेरा जाने वाला वात्सल्य से पूरित स्पर्श आखो से टपकता है माँ ।
तुम्हारी नातिन तनु ही अब मेरा सहारा है । नजरे बचाकर वही कही से कलम कागज़ ले आती है .सत्य ही है नारी की वेदना नारी ही जान सकती है ।सोचती हू अपने साथ इसे भी ले जाऊ । लेकिन मेरी ममता बेटी के रक्त को नहीं देख पाएगी .माँ , मे जिन्दगी के दोराहे पर खड़ी हू । एक तरफ मोत तो दूसरी तरह आपमान ,तिरस्कार ,प्रताड़ना है । घुट घुटकर मरने से तो एक बार मरना अच्छा है । हर बार मे अपनी वेदना से तुम्हे अवगत कराती रही हू । इस परिवार को बहु से ज्यादा टीवी ,फ्रिज ,गाडी और नोटों की गद्दिया प्रिय है । मेरा पति अपने दम पर जो हासिल नहीं कर सका , वह अब मेरे शरीर से खिलवाड़ करके वसूलने का आदि हो चुका है ।
अपनी प्रताड़ना के चिन्ह आपको दिखाना चाहती हू माँ । तनु बेचारी मरहम लगाती रहती है और कभी कभी खुद भी स्वाद चख लेती है ।
माँ कभी कभी तो मन करता है की बच्ची को हाथ लगाने वाले पति ,सास और ससुर की जीवन लीला समाप्त कर दू । किन्तु इससे माँ मेरे साथ साथ तेरी बदनामी होगी ।और नातिन का भविष्य भी गर्त मे चला जाएगा ।
बेचारगी के बीच तुम माँ एक बार मेरा दुःख सहन ना कर सकी थी । तब तुमने बाबूजी को कहा था ।
"सिया से कहो की अडजस्ट करना सीखे । " बाबूजी का यह ब्यान सुनकर हम दोनों खूब फफक फफक कर रोये थे माँ फिर कहती हू की नारी की व्यथा ,एक नारी ही जन सकती है ।
"भाई ने भी मुझे ही लताड़ा था । "माँ बाप अपना फर्ज पूरा कर चुके है , आगे उसकी किस्मत कब तक माँ के पल्लू से चपकी रहेगी । "
माँ क्या शादी के बाद मे 'अनवांटेड 'वस्तु हो गई । चोबीस साल जहा उगी , पनपी उसी आँगन से मेरी जड़े काट दी गई । फिर मेरा अपना कोंन है माँ ?
क्यों भाई इधर आकर राखी की लाज नही रखता । मुझे इस प्रताड़ना से मुक्ति नहीं दिलाता । क्यों मिलती है ओरत को यह कैद , हो सकता है तुम्हारे मोन का अर्थ तुम्हारी कैद रही हो माँ ।
माँ मेरे धेर्य की सीमा लांघी जा रही है .ओरत की जिन्दगी मे कुछ भी ठीक नहीं होता है .अगर तुमने जरा सा सहारा दिया होता, तो आज मै प्राण त्यागने का निर्णय नहीं लेती । तुम्हारे आँचल के नीचे ही कही गुजर बसर कर लेती ।
मे तो दस्तक देती रही माँ ,लेकिन बधिर बनकर तुम सभी ने मुझे अनसुना कर दिया । इस पत्र की समाप्ति के कुछ मिनटों बाद मे भी नहीं राहगी ।माँ अंतिम निवेदन है मेरी तनु को संभाल लेना । उसे मेरी तरह बेसहारा मत होने देना । नहीं तो वह नन्ही सी कली मुरझा जाएगी ।
रोज सुनती हू ,की बेटी के जाने के बाद माँ बाप को उसकी याद सताती है । जीतेजी तो उसे वे नरक से निकाल नहीं पाते ,फिर यह दिखावा कैसा । माँ मेरी मोत के नाम पर कोई वसूली मत करना । तनु को वही मात्र्तव देना जो तुम मुझे परोसती रही हो । यह तुम्हारा मेरे ऊपर एक अहसान रहेगा । तेरी सिया इसलिए असमय दम तोड़ रही है, क्योकि उसके अपने ही अब पराये हो गए है । मै जानती हू की तुमे छोटी के ब्याह की चिंता होगी .मेरी लाश से वसूली करके उसकी शादी मत करना । नहीं तो वह भी सुख को तरसेगी । यह आखरी पत्र मेने इसलिए लिखा है ताकि छोटी को सिया ना बनाना पड़े ।
तुम्हारी बीती हुई बेटी
सिया '
गुरुवार, 9 सितंबर 2010
गुरुवार, 2 सितंबर 2010
नमस्कार ,आज हम हिंदी साहित्य और अंग्रेजी साहित्य के लिए एक महत्व पूर्ण काम करने जा रहे है । आज से ठीक ३० दिन बाद महात्मा गाँधी के जन्मदिवस पर हम अपनी इ मेग्जिन कथा व्यथा का संचालन और प्रकाशन करने जा रहे है । यहाँ मेग्जिन हिंदी और अंग्रेजी की १० कहानियो और आपके व्यक्तिगत अनुभवों के साथ माह की २ तारीख को आपके सामने पेश होगी । तकनीकी काम बाल साहित्य क्लब के बाल सदस्य संभालेगे । धीरे धीरे इसका विस्तार भी होगा । पहला अंक "विश्व अहिंसा दिवस " विशेषांक होगा । ज्यादा जानकारी और अपनी रचनाये पोस्ट करने के लिए फेसबुक पर दिए गए इवेंट को देखे .....
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